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कहानी

स्वावलंबन की ओर यात्रा

मेरी अम्सा, एक करुणामयी महिला, जो स्वयं बधिरांध हैं, ने दृष्टि दिव्यांगता से ग्रस्त, बधिरांधता से ग्रस्त या सुनने में जिन्हें कठिनाई होती हैं, उन व्यक्ति

मेरी नाइलोन के धागे से थैली  बनाते हुए

डॉ. हेलेन केलर ने कहा था, “जो व्यक्ति  गंभीर रूप से दिव्यांग  हैं वह अपने अंदर  छिपी शक्ति को तब तक नहीं जानता जब तक उसके साथ सामान्य मनुष्य की तरह व्यवहार न किया जाए और उसे प्रेरणा न दी जाए कि वह अपने जीवन को स्वयं आकार दे। “ यह मेरी अम्सा के लिए सत्य हैं, जो बधिरांधता से ग्रस्त हैं और जिसने हेलन केलर इंस्टीट्यूट फॉर डेफ एंड डेफब्लाइंड (एचकेआयडीबी) के साथ करीब तीन दशकों पहले इसकी संस्थापिका स्वर्गीय सुश्री बेरोज़ वाच्छा के देख-भाल में अपनी अतुल्य यात्रा प्रारंभ की थी।

पर्किंस इंडिया के प्राचीनतम सहयोगियों में से एक, एचकेआईडीबी  शीघ्र हस्तक्षेप पर ध्यान केन्द्रित करने वाले कार्यक्रम, शिक्षा और व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों के साथ भारत में उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में सेवा करता हैं। रोज़गार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कौशल प्रशिक्षण दिया जाता हैं जो स्वावलंबन में वृद्धि करता हैं और रोज़गार के लिए अवसर खोल देता हैं।  

अनुराधा मुंगी, पर्किंस इंडिया में शैक्षिक विशेषज्ञ कई वर्षों पहले मेरी  के शिक्षकों में से एक के रूप में उस  समय को याद करते हुए कहती हैं, “मेरी  के साथ काम करना बहुत ही सुखद अनुभव था। सब्जी काटने जैसी गतिविधियों को करते हुए उसके स्वावलंबन की भावना को देखना अद्भुत था। वह बच्चों और कर्मचारियों से ऑर्डर लेने के लिए एचकेआईडीबी में विभिन्न विभागों में जाती थी, स्नैक्स/लंच तैयार करने में सक्रिय रूप से भाग लेती थी और इसे ऑर्डर देने वालों को देती थी। वह ख़रीददारी करना पसंद करती थी (विशेष रूप से अपने जन्मदिन के लिए अपनी कपडे चुनना) और उसे त्योहारों का जश्न मनाना पसंद था (विशेषकर होली जब वह अपने शिक्षकों पर पानी डालती थी और साथ में आनंद लेती थी)। ”

सुश्री बेरोज़ वाच्छा और एचकेआईडीबी में प्रतिबद्ध कर्मचारियों के समर्पण के कारण, समय के साथ, मेरी ने विकास के सभी क्षेत्रों में दक्षता हासिल की – साक्षरता से लेकर स्वतंत्र रहने के कौशल तक। वह एक स्वस्थ, परिपक्व, देखभाल करने वाली, कुशल और आत्मविश्वासी महिला हैं, जिसे देने और प्राप्त करने की अद्भुत क्षमता हैं।

मेरी धनिए की पत्तियों को साफ करते हुए

आज मेरी बागवानी में बहुत ही निपुण हैं और पौधों को बढ़ने के लिए उनकी देखभाल करना उसे पसन्द हैं। वह छोटे बच्चों की अद्भुत अभीक्षक हैं और प्रतिदिन की गतिविधियों में बहुत ही स्नेह और दया के साथ बच्चों की सहायता करती हैं। जिस क्षेत्र में वह रहती हैं  और काम करती हैं उस क्षेत्र में आसानी से वह गतिशील रहती हैं और संप्रेषण कार्ड के माध्यम से अपने समुदाय के लोगों से बातचीत करती हैं। ब्रेललिपि में खाना बनाने की विधि पढ़ कर रसोईघर में वह अपने पसंद का खाना बनाती हैं।

मेरी  की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि हैं   एचकेआईडीबी की व्यावसायिक प्रशिक्षण इकाई में सहायक प्रशिक्षक के रूप में नियुक्ति। कार्ययोजना के पूर्व छात्र के रूप में वह जानती हैं कि अल्पमूल्य वाले पत्थरों से सुन्दर हार कैसे बनाया जाता हैं या सजावटी मोमबत्तियाँ कैसे बनाई जाती हैं और साथ ही अपने छात्रों को स्वावलंबी बनाने में उसे प्रसन्नता होती हैं।

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