कहानी

सीतापुर में एक नये प्रशिक्षण कार्यक्रम ने अनेक एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों के लिए शैक्षिक अवसर निर्माण हुए।

भारत में बहुदिव्यांगता से ग्रस्त बच्चे सबसे अधिक आशंकित हैं। जब हम स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ,आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करते हैं तो हम एक कदम आगे बढ़ कर यह सुनिश्चित करते हैं कि इन बच्चों की पहचान हो और वे आवश्यक सेवाओं को प्राप्त कर सकें ।

आशा कार्यकर्ताएं एक ऍमडीवीआई से ग्रस्त बच्चे के पास बैठीं हैं जिसने हाथ में खिलौनों को पकड़ रखा है।

मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य (आशा) कार्यकर्ताएं बहु दिव्यांगता एवं दृष्टि दिव्यांगता (एमडीवीआई) से ग्रस्त बच्चों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यही कारण है कि पर्किन्स इंडिया ने जयति भारतम् की सहभागिता में सीतापुर के पिसावां ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) में ८९ आशा कार्यकर्ताओं के लिए एमडीवीआई से सम्बन्धित एक दिशा निर्देश सम्बन्धी प्रशिक्षण का आयोजन किया | आशा कार्यकर्ताएं स्थानीय समुदाय और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य प्रणाली के बीच सेतु का काम करती हैं। एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों की पहचान के बाद आशा कार्यकर्ताएं उन बच्चों की सफलता के लिए उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और हस्तक्षेप से जोड़ सकती हैं ।

दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चे प्रायः नज़रअंदाज़ रहते हैं, इसलिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है जिससे वे एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों की चुनौतियों को समझ सकें और उनकी पहचान कर सकें तथा समुदाय में ऐसे मामलों की पहचान कर सकें। एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों की पेहचान ना होने से यह बच्चे स्वास्थ्य एवं शिक्षा सम्बंधित सेवाओं से वंचित रह जाते हैं जिसके कारण इनका सीखना और आगे बढ़ पाना मुश्किल हो जाता है।

पिसावां के आशा कार्यकर्ताओं ने इस विशेष प्रशिक्षण द्वारा पहली बार एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों की चुनौतियों को समझा और साथ ही ये जाना के एक एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चे की कैसे पहचान की जाए । प्रशिक्षण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को अनुकरण गतिविधियों के माध्यम से एमडीवीआई से सम्बन्धित सूचना प्रदान की गई जिससे वे एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों की जरूरतों को समझ सकें। उदाहरण स्वरूप आशा कार्यकर्ताओं की आँख पर पट्टी बाँध दी गई और फिर आसपास के परिवेश को बंद आँखों से जानने के लिए एक दूसरे की तरफ दिशानिर्देशित किया गया जिससे वे उन चुनौतियों को अनुभव कर सकें जिसका सामना ये बच्चे करते हैं।

एक आशा कार्यकर्ता प्रशिक्षण के दौरान चर्चा में भाग लेतीं हुई ।

आशा कार्यकर्ताओं को एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों के साथ वार्तालाप करने और उनके अवलोकन का व्यावहारिक मौका मिला जिससे उन्होंने एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों की पहचान करने के साथ साथ उनकी शक्तियों और उनकी आवश्यकताओं को समझना सीखा।

प्रशिक्षण के बाद, आशा कार्यकर्ता सुश्री उर्मिला देवी ने साझा किया, “इस प्रशिक्षण ने मेरी आँखें खोल दी। इन बच्चों के साथ बातचीत करने के बाद, मैंने महसूस किया कि एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चे सीख सकते हैं और सही हस्तक्षेप से बहुत लाभ उठा सकते हैं। मैंने कई अंतर्दृष्टि प्राप्त की और एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों की क्षमताओं का निरीक्षण कर सकी।”

इस प्रशिक्षण से ८९ आशा कार्यकर्ताओं ने एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों की पहचान करना और उन्हें आवश्यक सेवाओं से जोड़ने के तरीकें सीखें ताकि वह आगे बढ़ें और सफल हो सकें। इस प्रशिक्षण द्वारा आशा कार्यकर्ताओं ने यह समझ हासिल की के इन बच्चों को भी गिनती में लाया जाए और समुदाय का हिस्सा बनने के लिए सक्षम बनाया जाए।

एमडीवीआई से ग्रस्त एक लड़का दो गुब्बारों को पकड़े हुए है, उसका सर झुका हुआ है और आँखें एक की ओर देख रही हैं |

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