स्नेहा अपने शिक्षिका के साथ एक गतिविधि में भाग ले रही है और उसका भाई उसके पास बैठा है और देख रहा है।
कहानी

मेरे भाई के सहयोग से सीखना

अंश, स्नेहा का भाई, एक सहयोगी बन जाता है, मार्गदर्शक, और उसके सीखने के दौरान एक शिक्षक बन जाता है।

भाई-बहन के बीच का रिश्ता अनमोल होता हैं। एक भाई-बहन का रिश्ता अक्सर सबसे महत्वपूर्ण और आजीवन संबंधों में से एक होता है, जो एक दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चा अनुभव करता है। अक्सर, एक भाई या बहन, एक शिक्षक, एक मार्गदर्शक और बहु- दिव्यांगता और दृष्टि दिव्यांगता (एमडीवीआई) से ग्रस्त बच्चे के लिए एक आदर्श बन जाता है। जब दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चे को शिक्षित करने की बात आती है तो परिवार की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और भाई-बहनों को शामिल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

स्नेहा और उसके भाई अंश की कहानी एक सुंदर और घनिष्ट बंधन का उदाहरण है जो भाई-बहनों के बीच विकसित हो सकता है। ७ साल की लड़की स्नेहा, जो हंसमुख है और दृष्टिदिव्यांगता, बौद्धिक और शारीरिक दिव्यांगता से ग्रस्त है, उसके साथ परवरिश पाने से उसके भाई अंश के जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। अंश के प्यार और समर्थन ने स्नेहा को सीखने और तरक्की करने में मदद की है। और स्नेहा आज पहले से कहीं ज्यादा सीख रही है और आगे बढ़ रही है!

जून २०२०  में, स्नेहा की पहचान उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले में डोर-टू-डोर जाँच के दौरान, पर्किन्स इंडिया के पहचान और हस्तक्षेप (IDI) कार्यक्रम के माध्यम से की गई थी। इससे पहले, वह अपने भाई अंश की तरह स्कूल जाने या किसी औपचारिक शिक्षा में शामिल होने में सक्षम नहीं थी। दिव्यांगता होने के कारण वह घर में ही रहा करती थी ।

Sneha having fun with her brother
स्नेहा का भाई उसे पुनर्बलन देकर चलने के लिए प्रोत्साहित करते हुए (उसके पसंदीदा आलू के चिप्स का एक टुकड़ा)

अब स्नेहा अपने भाई की तरह हर दिन सीख रही है। उसके पास एक शिक्षिका है, आरती, जो उसकी ज़रूरतों के आधार पर व्यक्तिगत शिक्षा प्रदान करती है और एक टीम जो यह सुनिश्चित करने के लिए काम करती है कि उसे आवश्यक हस्तक्षेप मिल रहा है। उसकी अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह चलना सीख रही है। आईडीआई कार्यक्रम के द्वारा प्राप्त वॉकर के सहारे, थोड़ी सहायता से, वह खड़े होने और कुछ कदम उठाने में सक्षम है। स्नेहा बहुत खुश है की वह अधिक स्वतंत्रता के साथ अपने आसपास की दुनिया को जान सकती है।

अंश इस पूरे सफर में कई मायनों में स्नेहा का साथी, मार्गदर्शक और शिक्षक रहा है। वह उसे वॉकर का उपयोग करके चलने के लिए प्रेरित करता है, और उसे पड़ोस के अन्य बच्चों के साथ संवाद करने और बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित करता है। स्नेहा को अपने भाई के साथ रहना अच्छा लगता है और वह साथ में की जाने वाली प्रत्येक गतिविधि के लिए उसका सहयोग करती  है। उनकी मां कहती हैं, ”भाई-बहन का बहुत प्यारा रिश्ता है, स्नेहा का भाई उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है। वह उसके शिक्षिका द्वारा की जाने वाली गतिविधियों को देखता है और वह स्नेहा को घर पर उन्ही  गतिविधियों में मदद करता है। ” और यहां तक ​​​​कि जब स्नेहा की शिक्षिका उसके साथ घर पर काम कर रही होती है, तो अंश उसे सीखने में सहायता करने के लिए तत्पर रहता है – सत्रों में मस्ती, खुशी,और प्रेरणा की एक और परत जोड़ता है।

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