दो किशोर लड़के बातचीत करने के लिए स्पर्शनीय सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते हुए मेज़ पर एक दूसरे के सामने बैठे हैं। बायीं ओर वाले लड़के के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट है और दाहिनी ओर वाले लड़के ने चश्मा पहन रखा है।
लेख

बहु दिव्यांगता और दृष्टि दिव्यांगता से ग्रस्त, या बधिरान्धता से ग्रस्त बच्चों के लिए सांकेतिक भाषा का महत्व

सांकेतिक भाषा का प्रयोग वैश्विक स्तर पर हो रहा है और यह बहुदिव्यांगता से ग्रस्त बच्चों के लिए संप्रेषण का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।

हर एक की यह मौलिक आवश्यकता है कि वह अपने विचारों को दूसरों के साथ साझा करे और दूसरे जो कुछ कहना चाहते हैं उसे समझे। यदि एक बच्चा दृष्टिदिव्यांगता के साथ बहुदिव्यांगता से ग्रस्त है तो सांकेतिक भाषा ही अनेक साधनों में से एकमात्र साधन है जिससे वह अपनी बात दूसरों तक पहुँचा सकता है। यदि वह अपनी बात को ठीक से अभिव्यक्त करना और दूसरों की बातों का उत्तर देना सीख जाए तो उसके सामाजिक कौशल में वृद्धि होती है। सांकेतिक भाषा आरम्भिक साक्षरता और भाषागत विकास को सहयोग प्रदान करने का एक अद्भुत तरीका है।

हर बहुदिव्यांगता या बधिरान्धता से ग्रस्त व्यक्ति अपनी संज्ञानात्मक या शारीरिक क्षमता के अनुसार सांकेतिक भाषा को सीखता है और उसका प्रयोग करता है। अपनी क्षमता के अनुसार वे दृश्य सांकेतिक भाषा (जिसमें नेत्रों के माध्यम से सूचना का संचार किया जाता है ) या स्पर्शनीय सांकेतिक भाषा (जिसमें स्पर्श के माध्यम से सूचना का संचार किया जाता है ) का प्रयोग कर सकते हैं।

एक किशोर लड़की एक महिला के सामने बैठी है, और वे स्पर्शनीय सांकेतिक भाषा का प्रयोग कर रहे  हैं।
एक किशोर लड़की एक महिला के सामने बैठी है, और वे स्पर्शनीय सांकेतिक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।

दुनिया भर में विभिन्न प्रकार की सांकेतिक भाषाओं का उपयोग किया जाता है; फिर भी, जब विभिन्न देशों के व्यक्ति एक साथ आते हैं और विभिन्न सांकेतिक भाषाओँ का उपयोग करते हैं, तो जिस तरह वे आपस में विभिन्न सांकेतिक भाषाओँ को साझा कर एक दूसरे की बात को समझते हैं,यह एक सुंदर दृश्य होता है।