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कहानी

जब पेशे में जुनून साथ होता हैं।

मधुमति बोस से मिलिये, जो एक अनुभवी प्रारम्भिक हस्तक्षेपिय पेशेवर हैं, और पर्किन्स इंडिया आईडीआई टीम, वृंदावन की महत्वपूर्ण सदस्य हैं।

मधुमति बोस एक अनुभवी प्रारम्भिक हस्तक्षेपिय पेशेवर  हैं, जिन्होने छोटे शिशुओं और छोटे बच्चे जो दृष्टि दिव्यांगता और विकासात्मक दिव्यांगताओं से ग्रस्त हैं, की प्रारम्भिक हस्तक्षेप  के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनमें मस्तिष्क/ मस्तिष्क आधारित दृष्टि दिव्यांगता (सीवीआई)  से ग्रस्त  बच्चे भी शामिल हैं। उनका जुनून और समर्पण इस क्षेत्र में कार्य करने वाले पेशेवरों के लिए प्रेरणा है, और वे ऐसे परिवारों के लिए एक सहायता स्तम्भ हैं। वर्तमान में सुश्री बोस डॉ॰ श्रांफ के चेरिटी नेत्र चिकित्सालय में वरिष्ठ प्रारम्भिक हस्तक्षेपिय पेशेवर के रूप में सेवाएँ दे रही हैं, और वे डॉ॰ श्रांफ, वृंदावन के नेत्र चिकित्सालय में पर्किन्स इंडिया आईडीआई टीम की महत्वपूर्ण सदस्य  हैं।

सुश्री बोस के साथ इस बातचीत में उन्होने इस क्षेत्र में अपनी यात्रा के छोटे-छोटे वृत्तांतों, अपने प्रेरणास्त्रोतों और अनुभवों को साझा किया।

आप इस क्षेत्र में कितने समय से कार्यरत हैं?

छब्बीस वर्ष से। मैंने अपनी शुरुआत स्पास्टिक सोसाइटी संस्था के साथ एक विशेष शिक्षक के रूप में  की थी और उसके बाद प्रारम्भिक हस्तक्षेप के क्षेत्र  में प्रवेश किया। मैं उस टीम की सदस्य थी जिसने एम्स, लोक नायक और चाचा नेहरू अस्पताल  में प्रारम्भिक हस्तक्षेप  केंद स्थापित किए।

अस्पतालों  में इस कार्य का  क्या महत्व है?

मैं दृढ़तापूर्वक यह महसूस करती हूँ, कि प्रत्येक अस्पताल  में प्रारम्भिक हस्तक्षेप  केंद्र होना चाहिए जहाँ के डॉक्टर परिवारों को तुरंत परामर्श के लिए भेज सकें ताकि आगे की जांच में कोई रुकावट न हो। जब बच्चे का जन्म होता है अथवा जब यह पता चलता हैं कि किन्ही बच्चों को विकास संबंधी कोई परेशानी है, तो उनके परिवारों के लिए यह बहुत स्वभाविक है कि वे जांच के लिए अस्पताल जायेंगे। माता-पिता को यह नहीं लगना चाहिए कि वे किसी विशेष जगह जा रहे हैं या उनके बच्चे की कोई विशेष आवश्यकता है- यह नियमित जांच कि तरह होना चाहिए।  अस्पताल में एक प्रारम्भिक हस्तक्षेप  केंद्र मेरे लिए एक समावेश है, जो बच्चे के जन्म के साथ ही शुरू हो जाता है।

एक छोटे बच्चे के साथ प्रारंभिक हस्तक्षेप  सत्र के दौरान दो महिलाएं।

इस पेशे को चुनने/अपनाने के लिए आपको किस बात ने प्रेरित किया है?

सर्वप्रथम मेरे बेटे को ओटटिस मीडिया [कान के मध्य में संक्रामण]) हुआ था जब वह डेढ़ वर्ष का था। यह परेशानी बच्चों में बहुत आम है। डॉक्टर ने कहा कि शायद वह सुन नहीं पाएगा। उस समय पूरी रात मैं अपने बेटे के कान में दवाई डालती रही। सुबह वह बिलकुल ठीक था, पर तब मैंने उन बच्चों के बारे में सोचा जिनमें दिव्यांगता है, और जहाँ पीछे मुड़ना संभव नहीं है और जहाँ प्रतिदिन उठकर उसी चुनौती का सामना करना है; और तब मैंने यह काम शुरू किया। मैंने बलवंत राय मेहता अस्पताल  के साथ स्वयंसेवक के रूप में कार्य शुरू किया। मुझे इस काम से प्यार हो गया और बहुत प्यार हो गया। इसके बाद मैंने विशिष्ट शिक्षण का कोर्से किया और उसके पश्चात मैंने औपचारिक रूप से विशेष शिक्षिका के रूप में कार्य प्रारम्भ किया।

और दूसरी घटना मेरे दादाजी कि थी; वह दृष्टि दिव्यांगता से ग्रस्त थे। उनमें बहुत आत्मविश्वास था, वे समाचार सुना करते थे और हम अक्सर सामयिक घटनाओं पर चर्चा किया करते थे। मैंने यह कभी महसूस नहीं किया कि वे दृष्टि दिव्यांगता से ग्रस्त थे। वे एक आदर्श  थे।

जब आप माता -पिता से बात करते हैं  तो सबसे पहला कार्य क्या करते हैं? उन माता-पिता के साथ आपकी किस तरह की बातचीत उनको या आप सभी को सहज बनाती है?

आमतौर पर माता –पिता बहुत ही घबराए हुए होते हैं। मेरी कोशिश उनको सहज महसूस कराने की होती है। मैं उन्हें मेरे बारे में, मेरी कमियों के बारे में बताती हूँ। मैं उन्हें कहती हूँ कि “आप अभी एक ५८ वर्षीय बूढ़ी महिला को देख रहे हैं जिसके बाल सफ़ेद हैं, और उसने अपने बालों में बैंगनी रंग का फूल लगा रखा है। क्या यह आपको सामान्य लगता है? मैं बहुत मायनों में सामान्य नहीं हूँ लेकिन फिर भी मैं अभी भी सक्रिय हूँ, कार्य कर रही हूँ। “ और ऐसे ही  मैं उन्हे सहज महसूस कराने के लिए खुद अपनी टाँग खींचती हूँ।

एक तरफ खड़ी एक महिला ध्यान से देख रही है जब एक नौजवान पेशेवर हस्तक्षेप  सत्र के दौरान एक बच्चे को पियानो वाले खिलौने से खेलने के लिए प्रोत्साहित कर  रहा है।

आपको प्रतिदिन कार्य करने के लिए क्या प्रेरित करता है?

मुझे अपने  काम से प्यार है।  मैंने यह जान लिया है कि मेरी कोई और दिलचस्पी नहीं है।   ना ही मैं कुछ और जानती हूँ और ना ही मैं जानना चाहती हूँ।    मैं इस काम से प्यार करती हूँ। मेरे अन्य कोई शौक नहीं है। बच्चों के साथ काम करना, यह मेरे लिए सब कुछ है। इसी आजमाइश से माता-पिता २४ घंटे गुजरते हैं। बहुत से लोग अभी भी मेरे काम को नहीं समझ पाते हैं । मैं यह स्वयं के लिए करती हूँ और यही मेरी प्रेरक शक्ति है। यह कार्य मुझे अत्यधिक आनंद देता है। यह कार्य मुझे ज़मीन से जोड़े रखता है और इस बात से दूर रखता है कि दुनिया इसे कैसे देखती है। मैं यह दृढ़ता से महसूस करती हूँ कि मेरे इस काम के कारण ही कोरोना वाइरस महामारी के तनाव ने मुझे भावनात्मक रूप से उतना प्रभावित नहीं किया था।

आपके कार्य के बारे में सबसे अच्छी बात क्या है?

सबसे अच्छी बात यह  है जब माता पिता अपने बच्चे को पहली बार कुछ करते हुए देखते हैं और उत्साहित हो जाते हैं। माता-पिता की छोटी से छोटी प्रतिक्रिया भी हमारे लिए बड़ी बात है।

जब बच्चा प्रगति करता है और नेत्र विशेषज्ञ या बाल-चिकित्सक स्नायु विशेषज्ञ कहते हैं “ओह! हमने ऐसे सुधार की उम्मीद नहीं की थी” यह बात मुझे ऊर्जा देती है।

एक महिला एक छोटा सा प्ले पियानो पकड़े हुए है और एक छोटा बच्चा उसके बटन दबा रहा है।

आप उन नए पेशेवरों के बारे में क्या महसूस करती हैं जिन्होंने इस क्षेत्र में अभी प्रवेश किया है?

हम आज की पीढ़ी के नवांगतुकों से हमारी पीढ़ी की तुलना नहीं कर सकते। जब मैंने प्रवेश किया था, तब मैं कुछ नहीं जानती थी। मैं जैसे जैसे आगे बढ़ती गयी सीखती गयी। पेशेवरों की यह पीढ़ी अधिक केंद्रित है। वे अपने बारे में आश्वस्त हैं।

हमें खुले दिमाग से उनसे बातों को साझा करना होगा और उन्हें बताना होगा जिससे कि हम उन्हें सहज कर सकें। यह महत्वपूर्ण है की हम उन्हें पहले सिखाएँ तथा फिर उनका आकलन करें, बजाय इसके कि पहले ही उनकी कार्यक्षमता का आकलन कर अपना निर्णय कर लें। प्रारम्भिक हस्तक्षेप उन क्षेत्रों में से है जहाँ अधिक पेशेवरों की आवश्यकता है और केवल कुछ ही पेशेवर शिशुओं और छोटे बच्चों के साथ कार्य कर रहे हैं। मेरा मानना है कि जितने अधिक पेशेवर प्रारम्भिक हस्तक्षेप में अत्याधिक दिलचस्पी लेना शुरू कर दें, उतना ही अच्छा होगा।

एक महिला एक बच्चे को, जो एक सहायक कुर्सी पर बैठा है, एक किताब को देखते हुए केले को छूने के लिए मार्गदर्शन कर रही है।

आईडीआई परियोजन के साथ आपके अनुभव के बारे में हमें बताएं।

वृंदावन का यह कार्यक्रम समय के साथ विकसित हुआ है। मैं पहले इस बात से आशंकित थी कि वृंदावन में वास्तव में क्या होने जा रहा है और इसका क्या परिणाम होगा। मैं इस बात से भयभीत

थी कि अपने प्रारम्भिक प्रशिक्षण के साथ टीम किस तरह से कार्य करेगी। क्या यह टीम बच्चों के साथ न्याय कर पायेगी? मेरे दिमाग में ये सारे विचार थे।

यद्धपी मुझे लगता है कि शुरुआत बहुत महत्वपूर्ण होती है। किसी कार्यक्रम के सुचारू रूप से चलने के लिए नियमित परामर्श और मार्गदर्शन महत्वपूर्ण है। और मुझे लगता है कि वे अच्छा कर रहे हैं। मैं बहुत खुश हूँ कि टीम बहुत उत्साही और जोशीली है, और उन परिस्थितियों में कार्य कर रही है जिनमें कार्य करना आसान नहीं है। वे दूरस्थ क्षेत्रों में घरेलू सत्र आयोजित कर रहे हैं जो कि सबसे अच्छी बात है। यह एक आंखे खोलने वाली बात है कि टीम सहानुभूति से पूर्ण है और कुछ सीखने और अलग करने कि इच्छुक है।

वे कई चुनौतियों का सामना करते हुए काम कर रहे हैं जैसे कार्यक्रम को समझने के लिए माता-पिता को परामर्श देते हैं ,, बच्चों को प्रारम्भिक हस्तक्षेप  सहायता केन्द्रों पर लाते हैं और बहुत कुछ। वे एक बहुत ही अद्भुत कार्य कर रहे हैं। टीम ने यह सिद्ध किया है कि अच्छा कार्य करने के लिए किसी को भी सही इरादे और तकनीकी कुशलता रखनी आवश्यक है।

यह बातचीत स्पष्टता और विस्तार के लिए संपादित की गयी है।

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