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कहानी

एक यात्रा समावेश की ओर

उत्तर प्रदेश में MDVI से ग्रस्त बच्चों के लिए प्रकाश की एक किरण

MDVI से ग्रस्त एक युवा लड़की अपनी सहपाठियों के बीच कक्षा में खुशी से बैठी है

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में एमडीवीआई से ग्रस्त बच्चों के लिए प्रोजेक्ट IDI एक आशा की किरण साबित हुई है। जयति भारतम् पर्किन्स इंडिया के प्रोजेक्ट IDI के प्रमुख भागीदारों में से एक है। प्रोजेक्ट IDI टीम बहुदिव्यांगता एवं दृष्टिदिव्यांगता (MDVI) से ग्रस्त बच्चों की पहचान करने के लिए स्क्रीनिंग का काम करती आ रही है और उत्तर प्रदेश के दर्जनों गावों के सेवा कार्यक्रमों में इन बच्चों को रेफर करती आ रही है।

प्रोजेक्ट IDI टीम न केवल उन बच्चों की पहचान कर रही है, जो पीछे रह गए हैं – बल्कि उन्हें सहायता प्रदान कर रही है, जागरूकता बढ़ा कर रही है, सरकारी सेवाओं तक पहुंचने के लिए परिवारों का मार्गदर्शन कर कर रही है और बच्चों को स्थानीय आंगनवाड़ियों और स्कूलों में दाखिला दिला रही है।

8 साल की जुड़वाँ बहनें, सुनैना और नैना की ऐसी दो सफलता की कहानियां हैं – दोनों बहुदिव्यांगता एवं दृष्टिदिव्यांगता से ग्रस्त हैं – जिनकी पहचाना लखनऊ के बाहर एक छोटे से गाँव में घर-घर जाँच के दौरान टीम के CBR कार्यकर्ताओं में से एक कार्यकर्ता के द्वारा की गयी थी। लड़कियों के पिता सब्जी बेचते हैं और माँ एक गृहिणी हैं।

एक परिवार अपने घर के बाहर एक साथ खड़ा है

सुनैना और नैना हमेशा हंसमुख और संवादात्मक रहीं हैं। फिर भी, माता-पिता अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित थे क्योंकि उनके पास सेवाओं या सहायताओं तक पहुंच नहीं थी, जो उन्हें पड़ोसी बच्चों की तरह स्कूल जाने में सक्षम बनाती हो।

जब प्रोजेक्ट IDI टीम द्वारा लड़कियों की पहचान की गई और परिवार को हस्तक्षेप के आगे के अवसरों के लिए मार्गदर्शन मिला, माता-पिता ने अपने दरवाजे खोल दिए और अतिरिक्त सहायता पाकर बेहद खुश थे।

तब से, प्रोजेक्ट IDI टीम लड़कियों के साथ लगातार काम कर रही है। उन्होंने परिवार को लड़कियों के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र प्राप्त बनवाने में मदद की और इससे  नैना को मुफ्त में व्हीलचेयर प्राप्त हो सकी । व्हीलचेयर के साथ नैना को गतिशीलता की एक नई स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। माता-पिता दोनों लड़कियों को स्कूल जाने में मदद कर सकते हैं, और अब पूरा परिवार एक साथ समुदाय में विभिन्न आयोजनों और समारोहों में भाग ले सकता हैं।

एक परिवार स्कूल की वर्दी में दो युवा लड़कियों के साथ है, उनमें से एक व्हीलचेयर का उपयोग करती है

पर्किन्स इंडिया के वरिष्ठ सदस्यों के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट IDI की टीम ने नैना, सुनैना और उनके परिवार से मिलना और उनके साथ काम करना जारी रखा है। उन्होंने नई गतिविधियाँ शुरू कीं है, जैसे सब्जियों को छांटना और चाय बनाना  – जो लड़कियों की पसंदीदा गतिविधि है,  जो मजेदार है और महत्वपूर्ण कार्यात्मक कौशल विकसित करने में भी मदद करती है। मां को सिखाया गया है कि लड़कियों को स्कूल के लिए तैयार होने में कैसे मदद करे।विविध गतिविधियों में नैना और सुनैना के भाई-बहन को भी  सही तरीके बताकर शामिल किया गया हैं, जैसे समय, संख्या और रंगों की संकल्पना समझना जिससे नैना और सुनैना की शिक्षा को आगे बढ़ाया जाये।

हालांकि स्थानीय स्कूल से शुरुआत में कुछ प्रतिरोध था, लेकिन प्रोजेक्ट IDI टीम ने सुनैना और नैना के दाखिले के लिए सफलतापूर्वक वकालत की थी। टीम की ओर से सहायता के साथ, वे दोनों अपने गाँव के स्कूल में जा रही हैं जहाँ उन्हें अब अपनी पूरी क्षमता हासिल करने का अवसर मिलता है।

सुनैना और नैना अब अधिक आश्वस्त हैं और अपने साथियों के साथ बातचीत करते हैं क्योंकि उन्होंने अपने सामाजिक कौशल का निर्माण किया है। स्थानीय स्कूल में जाने से उन्हें समुदाय में उनकी उम्र के अन्य बच्चों के समान दिनचर्या साझा करने में मदद मिली है – जैसे कि सुबह स्कूल के लिए तैयार होना, वर्दी पहनना, स्कूल की गतिविधियों में भाग लेना – वे सभी महत्वपूर्ण क्रियाएं जो दर्शाते हैं कि वे समुदाय में शामिल हैं।

नैना, MDVI से ग्रस्त एक युवा लड़की, घर पर विशेष शिक्षक सुधीर के साथ सब्जियों का
MDVI से ग्रस्त एक युवा लड़की सुनैना, अपनी माँ की मदद से तैयार होते हुए

सुनैना और नैना की यात्रा MDVI से ग्रस्त बच्चों को स्कूल और सामुदायिक जीवन में शामिल करने की दिशा में पर्किन्स इंडिया के काम का सिर्फ एक उदाहरण है। समाज में समावेशित होने से, नैना और सुनैना जैसे बच्चों को न केवल शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है, बल्कि सामाजिक कौशल, संवाद और जीवन में आत्म-निर्भरता का भी अवसर मिलता है।

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