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कहानी

एक परिवार का सपना सच हुआ, कि उनका बच्चा पाठशाला जाने लगा

नवीनतम जागरूकता, सामुदायिक समर्थन और आईडीआई टीम ईशान के लिए आखिरकार पाठशाला जाने के अवसर जुटा पाए।

दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चे का जन्म, या यह पता चलना कि बच्चे को दिव्यांगता है, परिवार को बहुत प्रभावित कर सकता है – खासकर जब कोई सहायता उपलब्ध नहीं हो । ९ वर्ष की उम्र में, हंसमुख और उत्साही ईशान दैनिक दिनचर्या की गतिविधियों में स्वतंत्र है और नए कौशल सीखने के लिए उत्सुक है, लेकिन उसके  सीतापुर जिले में अल्प दृष्टि और बौद्धिक दिव्यांगता को समायोजित करने के लिए कोई हस्तक्षेप या शिक्षा कार्यक्रम नहीं थे। 

ईशान की पारिवारिक कहानी

इशान के पिता एक दिहाड़ी मजदूर और उसकी माँ, एक गृहिणी है। उन्हें हमेशा यह आशा थी कि एक दिन ईशान अपने भाई-बहनों की तरह पाठशाला  जाएगा और अपने साथियों के साथ सीखेगा। लेकिन वे पूरी तरह से अज्ञात थे कि वे ईशान की मदद कैसे करें।

प्रोजेक्ट आईडीआई की वजह से बहु दिव्यांगता एवं दृष्टि दिव्यांगता (एमडीवीआई) से ग्रस्त बच्चों के शिक्षा के महत्व के बारे में सीतापुर और पूरे उत्तर प्रदेश के कई समुदायों में जागरूकता बढ़ी है। प्रोजेक्ट आईडीआई टीम विभिन्न तरीकों से समुदायों में जागरूकता बढ़ा रही है; सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत, जागरूकता सामग्री का वितरण, स्थानीय आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ संबंध स्थापित करना, गाँव के नेताओं को ईशान जैसे व्यक्तिगत परिवारों को सीधे जोड़ना।

एक स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, श्रीमती भाग्यवती ने प्रोजेक्ट आईडीआई के माध्यम से बहु दिव्यांगता एवं दृष्टि दिव्यांगता (एमडीवीआई)से ग्रस्त बच्चों के बारे में अधिक जानने के बाद,आईडीआई टीम को इशान के परिवार के  बारे में जानकारी दी।

प्रोजेक्ट आईडीआई में कदम

ईशान से मिलने और उसकी जरूरतों का आकलन करने के बाद,आईडीआई टीम ने महत्वपूर्ण दस्तावेज, दिव्यांगता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए परिवार का समर्थन किया, और गांव के पाठशाला में ईशान का दाखला कराया – परिवार के लिए उनका एक सपना सच हो गया ! आईडीआई टीम नियमित रूप से घर पर जाकर ईशान को कौशल सीखने में मदद कर रही है, जिससे पाठशाला के फिर से खुलने पर उसे सार्थक रूप से भाग लेने में मदद मिलेगी और वह अपने साथियों के साथ स्कूल जाना शुरू कर देगा।

ईशान रिंग को क्रम से लगानाके माध्यम से विभिन्न अवधारणाओं को सीख रहा है।
इशान ने अपने शिक्षक मुनीश के साथ माला बनाई ।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, श्रीमती भाग्यवती ने साझा किया, “मुझे पता था कि हमारे गाँव में एक दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चा है, लेकिन मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी कि इन बच्चों को शिक्षित किया जा सकता है। मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है कि जब आईडीआई टीम के सदस्य घर घर जाकर स्क्रीनिंग कर रहे थे तब मैंने इशान को आईडीआई टीम से अवगत  कराया। उनके माध्यम से परिवार को बहुत समर्थन मिला है क्योंकि बच्चे को पाठशाला में नामांकित किया गया है। आईडीआई टीम ईशान को स्कूल के दोबारा खुलने तक घर पर सीखने में मदद कर रही है।”

इशान की माँ कहती हैं, “हम आईडीआई टीम और जयति भारतम के बहुत आभारी हैं, क्योंकि उन्होंने ईशान की पहचान करने के बाद हमें पहले दिन से निर्देशित किया। उन्होंने हमें आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड (पहचान पत्र) और इशान के दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने में मदद की। इससे ईशान को पाठशाला में प्रवेश पाने में मदद मिली है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि मेरा बच्चा आईडीआई टीम के समर्थन से घर पर सीख रहा है और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि वे ईशान को  पाठशाला में समायोजित करने के लिए समर्थन करेंगे।

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