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चमन की कहानी

वृंदावन में आईडीआई टीम के लगातार प्रयास से चमन हर सप्ताह नए कौशल सीख रहा है।

पर्किन्स स्कूल ऑफ़ द ब्लाइंड का लोगो

चमन एक छोटा बच्चा है जो मथुरा जिले के एक गाँव में अपने परिवार के साथ रहता है। चमन को वृंदावन के श्रॉफ आई हॉस्पिटल में स्थित पर्किन्स इंडिया के समुदाय-आधारित पुनर्वास (CBR) आईडीआई परियोजना के कार्यकर्ताओं ने डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग के दौरान ढूंढ निकाला और यह पाया की चमन को बहु दिव्यांगता एवं दृष्टि दिव्यांगता (MDVI)  के लक्षण हैं। श्रॉफ आई अस्पताल में किये गए नैदानिक ​​और कार्यात्मक आकलन ने चमन में दृष्टि दिव्यांगता और मोटर डिले  होने की पुष्टि की। चमन को तुरंत ही अर्ली इंटरवेंशन केंद्र (प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र) में नामांकित किया गया ताकि उसके विकास संबंधी चुनौतियों को संभोदित किया जा सके और उसकी अवशिष्ट दृष्टि में सुधार किया जा सके। 

प्रोजेक्ट आईडीआई टीम ने चमन के साथ अर्ली इंटरवेनशन केंद्र (प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र) में काम करना शुरू किया। जबकि चमन के माता-पिता और शिक्षक हस्तक्षेप  शुरू करने के लिए उत्साहित थे, लेकिन चमन स्पष्ट रूप से उत्साहित नहीं था। वह खूब रोया और किसी भी शिक्षक के पास नहीं गया। वह नए लोगों, खिलौनों और जगह से पूरी तरह अभिभूत हुआ। आईडीआई टीम को तुरंत पता था कि उन्हें क्या करना है।उन्होंने चमन के घर का दौरा करने का फैसला किया, एक ऐसा वातावरण जो चमन के लिए परिचित और सुखद था।  

यहाँ तक की घर पर भी, चमन को विशेष शिक्षिका अमृता शर्मा और बाकि सभी टीम के सदस्यों के साथ घुलने- मिलने में कई सत्र लगें। लेकिन आखिरकार यह संभव हुआ। शर्मा ने अनुभव साझा किया, कि “किसी भी कौशल  को सिखाने के लिए शुरुआत करने से पहले हमें उसके साथ तालमेल और संबंध  बनाना था और इसमें हमें सामान्य से अधिक समय लग गया … हमने तब भी अलग-अलग तरीकों से अपने प्रयासों को जारी रखा और लगभग १०  हफ्तों के बाद, उसने हमें स्वीकार करना शुरू किया और सत्रों में सहयोग करना  शुरू किया। ”

टीम ने चमन को अपनी दृष्टि का अधिक उपयोग करने के लिए चमन के साथ कई तरह के मनोरंजक/रोचक खेल खेलें। उन्होंने उसे उज्ज्वल वस्तुओं और खिलौनों से परिचित कराया और उसे अपने मोटर कौशल का विकास करने के लिए चीजों तक पहुंचने और हाथों से पकड़ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। आईडीआई टीम उसके परिवार को यह भी शिक्षण दे  रही है कि घर पर उसके विकास में कैसे सहयोग करें। चमन की प्रगति आईडीआई परियोजना टीम के लिए बहुत उत्साह का विषय है। वे खुश और गर्वित हैं कि उन्होंने चमन और चमन के  परिवार के साथ मनोरंजक और  हर दिन नई चीजें सीख रहा हैं। आईडीआई टीम के एक सीबीआर कार्यकर्ता कपिल चौधरी ने कहा, “अब चमन की आंखों और हाथों के समन्वय में काफी सुधार हुआ है। उसने अब अपनी उंगलियों की मदद से वस्तुओं को पकड़ना शुरू कर दिया है और सहायता से अपने पैरों पर खड़ा होना भी शुरू कर दिया है। इससे हमें एहसास हुआ कि कोई भी कार्य असंभव नहीं है – किसी भी दिये गए कार्य में हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए। असफलता के बाद ही सफलता मिलती है। ”

 चमन अपने पिता की गोद में बैठकर चपाती को पकड़ कर खाते हुए।
 अपने पिता की गोदी में बैठे चमन को उसकीं शिक्षिका गेंद को पकड़ ने के लिए प्रोत्साहित करती है।

चमन की दादी शायद सबसे अधिक गर्वित है।  वह अपने दोस्तों को बहुत खुशी के साथ बताती है कि उसका पोता अब रोज नई चीजें सीख रहा है। वह चपाती (रोटी) और बिस्किट के टुकड़ों को पकड़ रहा है, और दूध खुद पी सकता है। उत्साह के साथ, वह बताती है कि वह घर में चारों ओर कैसे घूमता रहता  है और पहली बार उनके साथ दूकान तक  गया।  

जबकि ये कदम छोटे लग सकते हैं, पर चमन जैसे बच्चों के लिए, ये सीखने की दिशा में बड़े कदम हैं। पर्किन्स आईडीआई परियोजना टीम चमन को स्कूल के लिए तैयार कर  एक उज्ज्वल भविष्य के  विकास और सीखने में उसकी सहायता करती रहेगी ।

 चमन की दादी उसे पकडे रखती है जब वह खड़ा होता है।
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A small child looks at a picture held by a medical professional.
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