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कहानी

आशीर्वाद जो की मायने रखता है: कही पहाड़ियों और घाटियों में की गई एक प्रेरणादायक पहल

पर्किन्स इंडिया के सहयोग से, सेंटर फॉर कम्युनिटी इनिशिएटिव ने क्षेत्र में विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों और उनके परिवारों के लिए सेवाएं शुरू कीं है।

सीसीआई के बच्चे बाग़वानी गतिविधियों में मग्न।

यह कहानी है मणिपुर के उस माता पिता की जिन्होंने अपने बच्चे को गुणवत्ता से परिपूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से एक संगठन सेंटर फॉर कम्युनिटी इनिशिएटिव (सीसीआई) और इसके प्रथम परियोजना मलसॉम इनिशिएटिव (टीएम्आई ) की स्थापना उस क्षेत्र में किया। पर्किन्स इंडिया जिसे पहले पर्किन्स वॉयस एंड विजन के नाम से जाना जाता था के प्रशिक्षण और समर्थन के साथ संस्था ने विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों और इस क्षेत्र में उनके परिवारों के लिए सेवाएं शुरू कीं। पर्किन्स इंडिया, इस संस्था को सुश्री. रोज़ा वहलंग के नेतृत्व में जो की एक अनुभवी पेशेवर हैं उनके द्वारा सलाह और सहयोग संस्था को देता है। यह कहानी सीधा उस माता पिता से है जो की सीसीआई के संस्थापक निर्देशक है और पर्किन्स इंडिया के मास्टर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के एक प्रशिक्षित प्रतिभागी है।

चित्र का वर्णन: सी सी आई के बच्चे बाग़वानी गतिविधियों  में मग्न। 

“अपने कस्बे में स्पेशल बच्चों के लिए कोई विशेष केंद्र न होने की वजह से, मैंने अपने बेटे को दो साल नियमित विद्यालय में भेजा। मगर, पुरे समय मैं व्यथित था क्योंकि विद्यालय के कर्मचारी न तो प्रशिक्षित थे और न ही उनमे मेरे बच्चे के साथ काम करने की संवेदनशीलता थी। अतः निराशा की वजह से और कोई विकल्प न होने की वजह से हमने मणिपुर में एक विशेष विद्यालय की स्थापना की, द मलसॉम इनिशिएटिव ( टीएम्आई )।”

यह रास्ता इतना आसान नहीं था क्योंकि हमे इस क्षेत्र में कोई प्रशिक्षण और अनुभव नहीं था ।यद्यपि मैं भाग्यशाली  था की, मैं पर्किन्स इंडिया के संपर्क में आया और उन्होने मुझे अवसर दिए की मैं विशेष जरुरत वाले बच्चों को बेहतर तरीके से समझ सकूं और उनके बारे में गहरी समझ हासिल कर सकूं। मैंने पर्किन्स इंडिया द्वारा २०११ में संचालित द मास्टर टीचर ट्रेनिंग कोर्स में भाग लिया। हमारे विद्यालय, द मलसॉम इनिशिएटिव ने इस कोर्स के बाद एक नयी सुबह देखि। “पाठ्यक्रम अच्छी तरह से योजनाबद्ध था, और  प्रशिक्षक अपने विषय में पूर्णतया निपुण थे और उन्होंने हमें बहुत सारी गतिविधियों द्वारा सिखाया। यह एक तरह से ज्ञान के दरिया की तरह था।”

नए ज्ञान के साथ, अब हम शिक्षकों, कर्मचारियों और माता-पिता के लिए नियमित रूप से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं जिससे उनकी क्षमता का विकास हो। व्यक्तिगत शिक्षा योजनाएं विकसित की जाती हैं और कक्षा की गतिविधियों को प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए विचारपूर्वक तैयार किया जाता है। इसके अतिरिक्त, अभिभावक सहयोग वर्ग का भी गठन हुआ है। वे कार्यक्रम में स्वयं सेवक होने के साथ-साथ स्कूल के लिए धनराशि जुटाने में भी मदद करते हैं ।

“मास्टर ट्रेनिंग प्रोग्राम के दूसरे चरण ने मुझे और सक्षम कर दिया जिसकी वजह से मैं अपने विद्यालय के लिए  कुछ अति आवश्यक बदलाव के बारे में जानने में कामयाब हुआ। मंडलीय बैठक अब और संवादात्मक हो गई, अध्ययन कक्ष का ढाँचा और  बैठने की व्यवस्था में संशोधन हुआ, कक्षा शिक्षण, बाहरी गतिविधियाँ, प्रतिदिन के रहन सहन की गतिविधियों के साथ साथ पहले से निर्मित व्यक्तिगत शिक्षण योजना में भी सुधार हुआ और इन्हे खेल के माध्यम से सीखने के अंडा कार प्रारूप  से भी जोड़ा गया । प्रासंगिक व्यावहारिक ज्ञान जो हमे ट्रेनिंग में हुआ वह एक और महत्वपूर्ण पहलू था जिसकी वजह से विद्यालय में कई और सुधार हुए।

चूंकि हमारा स्कूल न केवल इच्छा से शुरू हुआ था बल्कि मजबूरी से भी शुरू हुआ था, हमारे पास ऐसे कई क्षेत्र थे जिनमे सुधार की आवश्यकता थी लेकिन वित्त पोषण के नियमित स्रोत की कमी के कारण उन्हें पूरा नहीं किया जा सका। हमारे क्षेत्र की दूरस्थता हमेशा संसाधनों को जुटाने के लिए एक बाधा है, हालांकि दूरस्थता हमारे काम में कभी बाधा नहीं थी ।तकनीकी सहायता के लिए पर्किन्स इंडिया के साथ हमारी साझेदारी स्कूल में शैक्षिक सेवाओं में सुधार करने में बेहद सहायक रही है। इस पिछड़े क्षेत्र में अपना समर्थन देने के लिए पर्किन्स इंडिया टीम को तहे दिल से धन्यवाद करता हूँ।

– श्री पोज़ागिन टोंसिंग
निर्देशक , सामुदायिक पहल केंद्र, मणिपुर
(मास्टर टीचर्स कोर्स लेवल वन – 2011-12 में प्रतिभागी)

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